गीतांजलि (Gitanjali)

  • प्रकाशन: 1910 (बंगाली), 1912 (अंग्रेजी में अनुवादित)
  • प्रमुखता:
    • इसमें 103 कविता संग्रह हैं।
    • मानव और ईश्वर के बीच के संबंध, भक्ति और आध्यात्मिकता पर आधारित।
    • 1913 में रबिन्द्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार दिलाने वाली कृति।

2️⃣ गोरा (Gora)

  • प्रकाशन: 1910
  • विषय: सामाजिक और राजनीतिक उपन्यास।
  • विशेषता:
    • जाति, धर्म और भारतीय समाज की समस्याओं का वर्णन।
    • मानवता, सत्य और धर्म की खोज।

3️⃣ घरे-बिरे (Ghare-Baire / The Home and the World)

  • प्रकाशन: 1916
  • विषय: सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन।
  • विशेषता:
    • भारत में ब्रिटिश शासन के समय का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य।
    • देशभक्ति, नैतिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का महत्व।

4️⃣ मनुस्मृति और समाज सुधार पर लेख

  • टैगोर ने समाज में जातिवाद, अंधविश्वास और अन्याय के खिलाफ लेख लिखे।
  • उनका उद्देश्य समानता और मानवता का संदेश फैलाना था।

5️⃣ नाटक और रंगमंचीय रचनाएँ

  • प्रमुख नाटक: राज़, नटसम्राट, चंद्रहास
  • विशेषता:
    • जीवन की नैतिकता, प्रेम, संघर्ष और सामाजिक मुद्दों का चित्रण।

6️⃣ गीत और संगीत

  • टैगोर ने हजारों गीत रचे, जिन्हें रबिंद्रसंगीत कहा जाता है।
  • प्रमुख गीत:
    • “जन गण मन” – भारतीय राष्ट्रीय गान
    • “अमार सोनार बांग्ला” – बंगाल का राज्य गान
  • उनके गीतों में प्रकृति, प्रेम और मानवता का सुंदर संगम मिलता है।

7️⃣ निबंध और लेख

  • शिक्षा, धर्म, समाज और राजनीति पर लेख।
  • उन्होंने विश्व साहित्य और भारतीय संस्कृति का संदेश विश्व स्तर पर फैलाया।

संक्षेप में

रबिन्द्रनाथ टैगोर की कृतियाँ साहित्य, संगीत और दर्शन में सामाजिक जागरूकता, मानवता और आध्यात्मिकता का संदेश देती हैं।

  • कविता: गीतांजलि, सोनार तरंग
  • उपन्यास: गोरा, घरे-बिरे
  • गीत और संगीत: रबिंद्रसंगीत, जन गण मन
  • नाटक और निबंध: चंद्रहास, समाज सुधार संबंधी लेख